अजीब फ़ितरत है मौसम की, एक ही मौसम अलग अलग अंदाज़,
कभी आपना सा तो कभी बेगाना सा
किसी को सावन तड़पाता है, तो किसी की रूह को भी भीगो देता है,
कोई साथ हो तो बूंदे अमृत सी, और दूर हो तो कांटो सी
ये अंदाज़ मौसम का है, इंसान का, या इस दिल का?
कभी आपना सा तो कभी बेगाना सा
किसी को सावन तड़पाता है, तो किसी की रूह को भी भीगो देता है,
कोई साथ हो तो बूंदे अमृत सी, और दूर हो तो कांटो सी
ये अंदाज़ मौसम का है, इंसान का, या इस दिल का?
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