सावन बरसे, तरसे दिल,
क्यों ना निकले
घर से दिल
बरखा में भी
दिल प्यासा हैं,
ये प्यार नहीं
तो क्या हैं
देखो कैसा बेकरार
हैं भरे बाजार
में
यार एक यार
के इंतजार में
एक मोहब्बत का दीवाना,
ढूंढता सा फिरे
कोई चाहत का
नज़राना, दिलरुबा के लिये
छमछम चले पागल
पवन, आये मज़ा
भीगे बलम
भीगे बलम, फिसले
कदम, बरखा बाहर
में
एक हसीना इधर देखो
कैसी बेचैन हैं
रास्तेपर लगे कैसे,
उस के दो
नैन हैं
सच पूछिये तो मेरे
यार, दोनों के
दिल बेइख्तियार
बेइख्तियार,
हैं पहली बार,
पहली बहार में
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